विवाह दो आत्माओं एवं दो परिवारों का पवित्र बंधन है। परन्तु आज विवाह अनावश्यक आडंबर, दिखावे एवं दहेज की कुप्रथा के कारण अनेक परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन गया है। इसी सामाजिक चुनौती का सशक्त समाधान है — सामूहिक विवाह सम्मेलन।
सामूहिक विवाह में समाज के अनेक जोड़ों का विवाह एक ही स्थान पर, एक ही समय, पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज एवं गरिमा के साथ संपन्न कराया जाता है। इसमें फिजूलखर्ची एवं दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं होता, फिर भी सभी संस्कार एवं परंपराएँ पूर्णतः निभाई जाती हैं।
दहेज न केवल कानूनन अपराध है, अपितु यह अनेक बेटियों के जीवन में दुःख का कारण भी बनता है। शास्त्रों में विवाह को “कन्यादान” कहा गया है — जो अपने आप में सबसे बड़ा दान है। ऐसे पवित्र बंधन को धन के लेन-देन से जोड़ना हमारी संस्कृति के विरुद्ध है। समाज का प्रत्येक सदस्य “न दहेज लेंगे, न देंगे” का संकल्प लेकर इस कुप्रथा को समाप्त कर सकता है।
हमारा समाज प्रतिवर्ष निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन करता है, जिसमें इच्छुक परिवार पंजीकरण कर सकते हैं। साथ ही योग्य वर-वधू के परिचय हेतु निःशुल्क वैवाहिक मंच भी उपलब्ध है। आइए, एक सादगीपूर्ण, दहेज मुक्त एवं गरिमामय समाज का निर्माण करें।